हिंदी न्यूज़: Border dispute | vast network of all rail corridors along china pakistan border | चीन, पाकिस्तान से सटे बॉर्डर पर रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा भारत

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शौर्य गुरंग, नई दिल्ली

चीन के साथ लगती पूर्वी और पाकिस्तान के साथ सटी देश की पश्चिमी सीमा पर भारत अपना रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है। डिफेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि सैनिकों, टैंकों, आर्टिलरी गन और कॉम्बैट वीइकल्स जैसे साजोसामान को जल्द पहुंचाने के लिए रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जा रहा है।

इसके लिए भारतीय सेना और रेलवे सीमा के करीब के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें

चीन

+ के मद्देनजर असम में सिलापत्थर, मुरकोंगस्लेक, न्यू मिसामारी और माकुम, अरुणाचल प्रदेश में भालुकपोंग और नगालैंड में दीमापुर में आर्टिलरी गन जैसे भारी उपकरणों की जल्द लोडिंग और अनलोडिंग के लिए रैम्प बनाना शामिल है। पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के पास टैंकों के तेज मूवमेंट के लिए भी इसी तरह के रैम्प बनाए जाएंगे।

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सूत्रों ने बताया कि मिलिट्री स्पेशल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रायल भी किए जा रहे हैं। ये ट्रेनें अभी केवल 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं। इसका कारण इन ट्रेनों पर भारी वजन और अलग-अलग आकार वाले साजोसामान का लदा होना होता है। बॉर्डर के करीब रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का मकसद सेना और उपकरणों के जल्द मूवमेंट के साथ ही बड़े खतरे की स्थिति में सेना को एक सेक्टर से दूसरे में शिफ्ट करना भी है।

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दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर है भारतीय सेना

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+ का अधिकतर ट्रांसपॉर्टेशन रेल के जरिए होता है क्योंकि सैनिकों और उपकरणों को हवाई जहाज के जरिए ले जाने की क्षमता कम है। सेना प्रत्येक वर्ष ट्रांसपॉर्टेशन के लिए 750-800 मिलिट्री स्पेशल ट्रेनों का इस्तेमाल करती है। सूत्रों ने बताया कि स्पेशल ट्रेनों और अन्य सर्विसेज के इस्तेमाल के लिए रेलवे को सेना से सालाना 2,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता है। बहुत स्थानों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होने और सेना का बजट कम होने की स्थिति में रेलवे अपने बजट का भी इस्तेमाल करती है।

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सेना के पास 5,000 रेलवे वैगन भी हैं। इन वैगन की ट्रैकिंग के लिए रेलवे ने एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम बनाया है। चीन की सीमा के नजदीक सड़कों, अंडरग्राउंड टनल और पुल बनाने पर भी फोकस किया जा रहा है। इससे वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लिए कनेक्टिविटी बढ़ सकेगी। चीन के साथ डोकलाम विवाद के मद्देनजर एलएसी के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

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