Political Statement Regarding Rift Between Tdp And Bjp In Andhra Pradesh Issue – Nda में दरार: इस्तीफे के सिलसिले के साथ तीखी बयानबाजी शुरू, शिवसेना ने ली चुटकी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 08 Mar 2018 12:23 PM IST

बजट 2018-19 के प्रस्तुत होने के बाद बीजेपी और टीडीपी का मनमुटाव अब अपने अगले चरण में पहुंच चुका है। सीनियर नेताओं के संकेतों के बाद इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है। मामले पर हो रही सियासी बयानबाजी भविष्य की राजनीति के संकेत दे रही है। 

टीडीपी सांसद राम मोहन नायडू ने कहा कि अरुण जेटली के बाद यह फैसला लिया गया। जब हम अपने अधिकारों की बात करते हैं तो इसे इस तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। गठबंधन बातचीत की स्थिति में है। हम इसे राजनीतिक लड़ाई नहीं बनाना चाहते। यह लड़ाई आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए है। 

शिवसेना पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत का कहना है कि हमें इसका अंदेशा पहले ही हो चुका था। गठबंधन के घटकों के बीजेपी साथ मधुर संबंध नहीं रहे। लोगों की शिकायतें और नाराजगी बढ़ती जाएगी और वह गठबंधन से बाहर होते चले जाएंगे। 

वहीं शिवसेना की मनीषा कायंदे ने कहा कि टीडीपी से पहले उद्धव ठाकरे की अगुवाई में शिवसेना अपना स्टैंड साफ कर चुकी है। बीजेपी को इस बारे में सोचना होगा। एनडीए के पुराने साथियों को एक साथ रहना होगा। बीजेपी 2019 के आम चुनावों को लेकर अतिआत्मविश्वास में है। यह उनके लिए चुनौती बन सकता है। 

इस मामले पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी अपनी टिप्पणी दी है। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू से अपने फैसले पर दोबारा सोचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का समय जब भी मांगा जाता है वह मिलने के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन यह समझना होगा कि अगर सभी राज्य विशेष राज्य का दर्जा मांगने लगेंगे तो केंद्र सरकार के लिए मुश्किल होगा। रामदास अठावले ने कहा कि टीडीपी का एनडीए से अलग होने का फैसला ठीक नहीं है। चंद्रबाबू नायडू को अपने फैसले पर एक बार फिर से सोचना चाहिए। 

बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस तनातनी में कांग्रेस ने भी छलांग मारी है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि यह कोई संकट नहीं है। बीजेपी और टीडीपी के बीच मैच फिक्सिंग है। अगर वास्तव में कुछ है तो टीडीपी अब तक गठबंधन में क्यों है। उसे अलग हो जाना चाहिए। टीडीपी के दो सांसदों के अलग हो जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।   

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