चिकन खाने वालों के लिए अलर्ट: सीईसी ने चेताया- बढ़ रहा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल

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सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने क्या कहा

चिकन खाने वालों के लिए अलर्ट:

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र ने उन सभी विज्ञापनों की कड़ी आलोचना की है जिसमें चिकन में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल न किए जाने का दावा किया गया है और उसने पोल्ट्री क्षेत्र में बढ़ते एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को लेकर आगाह भी किया।

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने मंगलवार को अखिल भारतीय कुक्कुट विकास एवं सेवा प्राइवेट लिमिटेड को उनके विज्ञापनों के लिए लताड़ा और उसे (विज्ञापनों को) पूरी तरह मिथ्या प्रस्तुति बताया।

यह विज्ञापन 2014 के चिकन पर सीएसई के अध्ययन की चर्चा करता है लेकिन उनका कहना है कि अध्ययन के नतीजों को तोड़ मरोड़ कर यह दिखाया गया है कि पोल्ट्री क्षेत्र में एंटीबायोटिक दवाओं को दुरुपयोग नहीं किया जाता और चिकन पूरी तरह सुरक्षित है।

सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने क्या कहा

सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से गलत तथ्य है और भारतीय पोल्ट्री उद्योग में एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल किया गया जाता है। पोल्ट्री क्षेत्र में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।’’

दूसरी तरफ, मानव के क्रमिक विकास के चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत को गलत बताने के करीब एक महीने बाद केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने बुधवार को छात्रों से वैज्ञानिक प्रवृति और जिज्ञासा को अपने अंदर समाविष्ट करने का आह्वाहन किया।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के मौके पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि प्राकृतिक कानूनों को जानना और उनका पालन करना धर्म है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जो भी पढ़ाया जाए, उसमें छात्रों के बीच वैज्ञानिक प्रवृति और जिज्ञासा को बढ़ावा देना चाहिए।’’

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने पिछले महीने औरंगाबाद में दावा किया था कि मानव के क्रमिक विकास का चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से गलत है और स्कूलों तथा कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे बदला जाना चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आॅल इंडिया वैदिक सम्मेलन में कहा था, ‘‘विकास का डार्विन का सिद्धांत गलत है। वैज्ञानिक इसे 30-35 साल पहले ही खारिज कर चुके हैं।

यह कहना गलत है कि मानव का विकास बंदरों से हुआ था और विज्ञान तथा इतिहास की स्कूली पुस्तकों से यह संदर्भ हटाया जाना चाहिए।’’

सिंह ने बुधवार को कहा कि यूरोप में विज्ञान और धर्म के बीच लंबा संघर्ष है लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है।

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